हमारे भारतीय समाज की कुछ अनापेक्षित रुडियों के कारण एक गे व्यक्ति का जीवनसाथी खोज पाना एक ऐसा कठिन कार्य है जिसे करने का कुछ ही लोग संकल्प ले पाते है। किसी स्ट्रैट व्यक्ति की तरह ही स्वाभाविक रूप से एक गे व्यक्ति की भी अपने भावी-जीवनसाथी से जुडी कुछ अपेक्षाएं होती हैं। ये अपेक्षाएं, समाज के द्वारा भविष्य में की जाने वाली टीका-टिप्पणियों के भय के कारण
कुछ अधिक सख्त होती है और इसी से एक गे व्यक्ति का अपने लिए एक जीवन साथी खोजना, भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा हो जाता है। चूँकि अधिकाश लोग जो उन अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं, समाज के डर से छिपे हुए रहते है, और इसीलिए अगर कोई गे अपना जीवन-साथी खोज पाने में सफल रहता है, एक उदाहरण का विषय बन जाता है। पर संकट और संघर्ष इतने पर ही ख़त्म
हो जाता तो गनीमत होती। कितने ही ऐसे गेस भी है जो अपनी स्वाभविक प्रकृति से विवश होकर किसी के साथ सम्बन्ध तो बना लेते है पर परिवार और समाज के द्वारा तिरस्कृत किये जाने के डर से उसे निभा नहीं पाते और अंत में घुटने टेक देते है! पता
नहीं कि इन लोगो की निंदा की जाये या उनसे सहानुभूति रखी जाये! जहाँ तक सहानुभूति का प्रश्न है, तो उसका कारण तो आप सभी जानते ही होंगे अतः उस पर बात नहीं करना चाहूँगा। निंदा किये जाने का
एक संभावित कारण उनके द्वारा सब ख़त्म कर दिए जाने पर होने वाली उनके जीवनसाथी की दशा है। एक तो अपने प्रिय से बिछुड़ने का दुःख, और ऊपर से एक नया साथी खोजने की हताश कर देने वाली प्रक्रिया! बिना किसी कारण के आपने अपने
समय और भावनाओं का जो निवेश एक व्यक्ति में करा होता है, एक झटके के साथ शून्य पर आ जाता है। माना कि आप मेरे द्वारा कही 'दोबारा से की जाने वाली जीवनसाथी की खोज' में अपने उच्च नैतिक और प्रेम सम्बन्धी मूल्यों के कारण विश्वास न रखते हो, पर अगर कोई साधारण मूल्यों वाला व्यक्ति अकेले जीने से भयभीत होकर इस खोज को करने के लिए दोबारा विवश हो जाये
तो उसकी दशा क्या होती होगी इसका अनुमान तो अवश्य लगा सकते होगें। ऐसे में, मैं सम्बन्ध शुरू करके तोड़ने वालो से पूंछना चाहूँगा कि ऐसा करने का अधिकार आपको किसने दिया? आपकी नासमझी और कायरता का खामियाजा एक ऐसा व्यक्ति क्यों भुगते, जिसने आपकी कही हर बात को सच मान लिया था? आपकी अपने परिवार और समाज के सामने की झूठी प्रतिष्ठा आपके द्वारा किये गए एक व्यक्ति के लिए प्रेम से बढकर कैसे हो गयी? कृपया जवाब दें।
*******
Due
to some harsh stereotypes of Indian Society as a whole, it is such a difficult
decision for a gay to have a life partner that very few dare to do so. Obviously
like a straight person, a gay also has certain expectations from his
prospective life partner. And due to the fear of future adverse commentary by
society, usually these expectations are more- both quantitatively and
qualitatively. This is the reason why finding a suitable life partner by a gay
becomes as difficult as finding a needle in a haystack. The problem of finding
such a suitable life partner is aggravated by the fact that most gays remain in
closet due to the fear of society. Therefore those who succeed in it become
example for others. But the problems for a gay don’t end with finding a life
partner. There are so many gays who, compelled by their inherent desires, enter
into a relationship but soon realize that they can’t face the criticism and
humiliation by their families and society and therefore they break everything
off. I don’t know what I should say about such people, criticize them or sympathize
with them. Most of you, must be aware of the reason for showing sympathy,
therefore let me concentrate on the reasons for criticism. The reason for
criticism is the condition of their erstwhile life partner who has been
abandoned for no fault of his own! I mean the tiresome process of finding a new
life partner along at the top of the sorrow of getting separated from your
loved one! Anybody can imagine the condition. You have invested so much of your
time and emotion in the form of love towards a person and suddenly everything
is crashed to zero! I know many of you might not be agreeing with me on the issue
of searching a new life partner due to your high values of morality and love.
But think from the point of view of a common person who is too afraid to spend
all his life alone. In such circumstances I would like to ask the person who is
breaking up his promise- Who gave you right to this effect. Why should a person
who relied on whatever you said be made to pay the price for your own foolishness
and cowardice? How come your false honor in front of your families and society
became more important than your love for a person? Please do reply!
No comments:
Post a Comment